Thursday, 1 March 2012

पर मैं खुश हूँ .. बेहद खुश


दीवानापन देखा है कभी ?
नहीं देखा .. तो आज देख लो
कभी कभी यूँ भी होता है .. मेरा मन
क्यूँ ?
नहीं हो सकता क्या ?
मन है .. मन का क्या ?
एक आदिम पिपासा
सदियों से पलती
कभी तो बाहर आनी ही थी
आज आ गयी
दीवानगी के रूप में
बात को पचाना मुश्किल है
है ना .. ?

पर मैं खुश हूँ .. बेहद खुश
खुद को पाना अच्छा लगता है
कभी कभी यूँ भी बने रहना
भला सा लगता है ..

25/2/12

12 comments:

  1. पर मैं खुश हूँ .. बेहद खुश
    खुद को पाना अच्छा लगता है
    कभी कभी यूँ भी बने रहना
    भला सा लगता है ..जी ऐसा भी होता है..... बहतरीन भाव....

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  2. sunder abhivyakti ....ye khushi bani rahe ...

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  3. खुद को पाना अच्छा लगता है
    कभी कभी यूँ भी बने रहना
    भला सा लगता है ..

    बेहतरीन अभिव्यक्ति ..

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  4. खुद को यूँ ही पाती रहो ..यूँ ही खुश रहो,बस.

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  5. अपनी खुशी को अपने दिल में यूँ ही बनाये रखना

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  6. बहुत सुन्दर एवं साकारात्मक प्रस्तुति !

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  7. सुंदर प्रस्तुति......खुशियाँ कायम रहे इन्ही शुभकामनाओं के साथ स:परिवार होली की भी हार्दिक शुभकामनाएं.....

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  8. गहरी अभिव्‍यक्ति।
    सुंदर प्रस्‍तुतिकरण।

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  9. खुद को पा लिया तो जावन को पा लिया ... ये दीवानापन हमेशा ही अच्छा होता है ...

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  10. kya kahoon...aap jaise shabd kahaan se laoon...hr shabd,hr rachna behad sundar,lajawab,anupam,adbhut,aditya...kanhaa ki tarha...aapke mann ki tarha...bilkul aapke apne jaise...deewane,ek dum deewane...aapke jaise...!!!

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  11. Gunjan ..ek alag andaaz se bhari aapki kavitayen hain..achhi lagi....bahut achhi lagi.....

    Meenakshi Srivastava
    meenugj81@gmail.com
    welcome in my blog- kalam ka kamaal , man ki udaaan.

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  12. आपकी खुशियाँ सदा बनी रहे यही शुभकामना है.

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