Wednesday, 27 July 2011

मौजें.....



दिल की मौजें
क्या किसी समंदर में उठती
मौजों से कम होती हैं
_________

ये तो दर्द का वो दरिया होता है
जिसमें न डूबते बनता है,
न उबरते

सलाम ....सलाम ....सलाम .....
दिल की इन खुबसूरत,
बेहतरीन, बेहिसाब मौजों को
'गुंजन' का सलाम .....

गुंजन
२६/७/११

2 comments:

  1. क्या कहने, बहुत बढिया

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  2. बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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