Monday, 29 August 2011

मकड़ ज़िन्दगी .......




सम्बन्ध क्या होते हैं - नहीं जानती
रिश्ते क्या होते हैं - ये भी नहीं जानती
बस अगर कुछ जाना है
इस छोटे से जीवन में
तो वो निरा-कोरा एक शब्द है___ प्यार

इसी शब्द को लेकर जी है
ये छोटी-सी मकड़ ज़िन्दगी
हाँ जाले भी बुने हैं
मन - भर कर बुने हैं
______

क्यूंकि इसके सिवा
कुछ कर भी तो नहीं सकती थी
कुछ और करने को बचा भी तो नहीं था

तुम बिन __ कृष्ण

गुंजन
४/८/११

11 comments:

  1. वह ..बिलकुल अलग भक्तिभाव...
    बहुत सुंदर...

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  2. बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति..

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  3. कल 31/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. भक्ति और प्रेम से भरी हुई कविता .
    बधाई

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  5. अद्भुत...क्या कहूँ ? मौन कर दिया आपकी रचना ने...

    नीरज

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  6. किशना के प्रति अनोखे ढंग से भक्ति दिखाती हुई बेमिसाल रचना /बहुत बधाई आपको /



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  7. खूबसूरत रचना ..कृष्ण मय करती हुई

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  8. अपनी भावनाओं को बहुत खूबसूरती से श्री कृष्ण के सामने व्यक्त करती खूबसूरत रचना |

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