Friday, 23 December 2011

मन है आज फिर .. नन्हे पंखों वाली बच्ची बन जाने का


मन है आज फिर
उजले पंखों वाली
बच्ची बन जाने का
सुनहरी रंगबिरंगी धूप को
नन्ही मुट्ठी में भर लेने का
तारों भरे आकाश में
चंदा मामा की सवारी करने का
chewing gum को गालभर
फुलाने की शर्त लगाने का
झूले पर आकाश भर
लम्बी पेंगे लेने का
बिन बात के इतराने का
भाई-बहनों संग फिर से
गुत्थम-गुत्था करने का
आँख भर आँसू रोने का
दादी को खिजाने का
माँ को चिढ़ाने का
औ पापा से डर जाने का
हाँ .. मन है आज फिर
नन्हे पंखों वाली __ बच्ची बन जाने का

गुंजन
२२/१२/११

6 comments:

  1. हाँ .. मन है आज फिर
    नन्हे पंखों वाली बच्ची बन जाने का

    बहुत ही सुन्दर सोच ..

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  2. कोमल भावो का सुन्दर संयोजन्।

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  3. फिर से बच्चा बन जाने को हर कोई लालाइत रहता है...बचपन के दिन भी क्या दिन थे...

    नीरज

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  4. कोमल भावो की बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  5. मन का बच्चा हमेशा यूँ ही बना रहना चाहता हैं

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