Tuesday, 22 November 2011
कोई और नहीं है ....... कृष्णा !!
कभी चाहूँ तुम - में बसना
कभी चाहूँ तुम - सी बनना
कभी चाहूँ जी - लूँ तुमको
कभी चाहूँ पा - लूँ तुमको
हर रंग में
हर रूप में
हर चाह में
हर राह में
बस तुम हो
तुम्हीं हो
कोई और नहीं है
....... कृष्णा !!
गुँजन
२१/१०/११
Tuesday, 15 November 2011
खुबसूरत तोहफा
इतना आरोप, इतना संदेह
क्यूँ ..... ?
प्रश्न तो मुझे करने चाहिए ?
आक्षेप तो मुझे करना चाहिए ?
जीवन तो मेरा बदला है ना ?
तुम्हारा कहाँ .. ?
फिर भी हमेशा की तरह कटघरे में
मैं ही क्यूँ .... ?
________
क्या मेरा दर्द ... मेरे आँसू
सब बेमानी हैं !!
हाँ कह दो कि - सब खुबसूरत धोखा हैं
ओह्ह्ह्ह !!!!!
बेहतरीन तोहफा दे दिया ... तुमने तो मुझे आज
वो भी ज़िन्दगी के इस मोड़ पर आकर
तुमसे तो ये उम्मीद ना थी
ना ... कभी नहीं
कभी भी नहीं ....... !!
..... १५/११/११
Monday, 14 November 2011
मृत्यु ....
मृत्यु को कितनी बार
आमंत्रित किया है मैंने
खुद भी नहीं जानती
_______
आज फिर से तुम्हारा
आह्वाहन कर रही हूँ
आओगी क्या मुझे लिवाने
मेरी मृत्यु ..... !!
.....
१४/११
Sunday, 13 November 2011
कृष्ण का अन्तर्द्वंद
व्याकुल हो ना कृष्णा
क्यूंकि चाह कर भी
वो कह नहीं पाते
.... जो कहना चाहते हो
तुम्हारा अन्तर्द्वंद रोक लेता है तुम्हें
आखिर कृष्ण हो ना ..
देवता बनने के लिए
कोई तो बलिदान देना ही होगा
वही दिया भी !!
__________
और राधा ..
इस धरा पर बरसों से
प्रेम का मूर्त रूप
तो भला उसकी आँखों में
व्याकुलता कैसी ?
अगर है भी ....... तो बस
अपने कृष्ण की अकुलाहट को सुनने की
उनके मौन को समझ पाने की
अब तो मौन तोड़ो कृष्णा ....... !!
.. २२/१०/११
Saturday, 12 November 2011
मेरे अंत समय में ..... मेरे द्वारे
तुम्हें कृष्ण कहती हूँ
तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगता ना !!
कृष्ण आराध्य हैं मेरे
और तुम्हारी -
तुम्हारी आराधना की है मैंने
अब तुम्हीं बताओ
क्या फर्क हुआ
तुम में और कृष्णा में .. ?
________
अपने अंत समय कृष्ण आये थे
...... यमुना किनारे
तो शायद तुम भी आ जाओ
मेरे अंत समय में .. मेरे द्वारे
बोलो आओगे ना ... ?
.....
१२/११/११
Saturday, 5 November 2011
क्या हर बार तुम्हारा देवता बनना ज़रूरी है - कृष्णा ??
कृष्ण तो स्वयं में एक प्रश्न हैं
वो भला क्या उत्तर देंगे ..
कुरुक्षेत्र में गीता का प्रवचन दे
खुद तो ईश्वर बन बैठे
पर वृन्दावन में बिलखती
राधिका को छोड़
क्या उसकी नज़र में अराध्य बन पाए !!
_________
बोलो ज़वाब दो ...... कृष्णा ??
भले ही दुनिया तुम्हें ईश्वर कह ले
भले ही वेद - पुराण तुम्हें
महानता की श्रेणी में ला खड़ा करें
पर राधिका नहीं बुला सकती
तुम्हें कभी .... दिल से - ' देव '
हाँ प्यार करती थी वो तुम्हें ... पागलों की तरह
और हर जन्म में करती भी रहेगी
पर क्या हर बार तुम्हारा
देवता बनना ज़रूरी है !!!!!!!!!!!
बोलो कृष्णा .... ??
गीता सार में आत्मा की अमरता की
दुहाई दी थी तुमने
याद है कृष्णा .. ?
तब फिर क्यूँ लौटे थे
उस उफनती यमुना के किनारे
इंतज़ार करती उस पगली राधा के पास
प्रवचन देना आसन होता है कृष्णा
पर उसे निभाना और समझ पाना - बेहद मुश्किल
.....
४/११/११
Friday, 4 November 2011
पनाह
गुंजन
३/१०/११
जब आयेंगे हम
एक - दूजे की बाँहों में
देखना वख्त कहीं
थम - सा जायेगा
ये दुनिया जो खुद पर
इतराती है ..... इतना
तब हमसे मुहब्बत के लिए
पनाह मागेंगी ....
.
३/१०/११
जब आयेंगे हम
एक - दूजे की बाँहों में
देखना वख्त कहीं
थम - सा जायेगा
ये दुनिया जो खुद पर
इतराती है ..... इतना
तब हमसे मुहब्बत के लिए
पनाह मागेंगी ....
.
Subscribe to:
Posts (Atom)






