Tuesday, 10 January 2012
सुन पगली .... कब्बी इश्क ना करना
सुन लड़की !!
तू इत्ते सारे रंग कहाँ से लाती है ?
कहीं चोरी तो नहीं करती ना ?
फूलों के रंग
सपनों के रंग
हवा के रंग
तितलियों के रंग
रोने के रंग
और इन सब से ऊपर
ये मुआ इश्क का रंग
ए लड़की !!
सच्ची बता
तुझे कहीं इश्क तो नहीं हो गया ?
इत्ते सारे रंग तो बस
इश्क होने पर ही खिला करते हैं
सुन पगली !!
कब्बी इश्क ना करना
ना .. कब्बी नहीं
वर्ना ये रंग तुझे कहीं का ना छोड़ेंगे
पागल तो तू पहले से ही है
अब क्या मरने का इरादा है .. ?
गुंजन .. १०/१/१२
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अरे वाह !!!
ReplyDeleteहाँ मरने का इरादा हो तो ही इश्क करना चाहिए.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
ReplyDelete:))..सही कहा !
ReplyDeletekalamdaan.blogspot.com
बेहतरीन ..
ReplyDeleteसुन्दर अभिव्यक्ति
ReplyDeleteगहन अभिवयक्ति........
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