Friday, 4 November 2011

पनाह

गुंजन
३/१०/११


जब आयेंगे हम
एक - दूजे की बाँहों में
देखना वख्त कहीं
थम - सा जायेगा
ये दुनिया जो खुद पर
इतराती है ..... इतना
तब हमसे मुहब्बत के लिए
पनाह मागेंगी ....

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4 comments:

  1. बहुत ही अच्छी.....

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  2. Mohbbat me hamesha waqt tham hi jata h..
    Achi h ye mohbbat k alfaz..

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