Tuesday, 4 October 2011

कुछ तो है मेरा .... बस मेरा


अपनी धुन
अपना साज़
अपना अंदाज़
यही ज़िन्दगी है मेरी
तू नहीं तो तेरी
बेरुखी ही सही
कोई तो है - मेरी
..... बस मेरी

गुन्जन
३०/९/११

8 comments:

  1. कल 06/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. सकारात्मक सोच के साथ लिखी गई रचना ..

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  3. तुम्हारी बेरुखी कोई और सह भी नहीं सकेगा ...

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  4. सच है ये बेरुखी उनकी कभी नहीं जाती ...

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  5. सकारात्मक सोच ...बहुत अच्छी रचना

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  6. वाह क्या बात है...
    बहुत बढ़िया चिंतन...
    विजयादशमी की सादर बधाईयां...

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