Wednesday, 27 July 2011

अरमान......



शाम के आने और जाने में
बस दो पल हैं और बाकी
________

तू मुझ में ढल जाये
मैं तुझ में ढल जाऊँ
यही अरमान है बाकी.....

गुंजन

Saturday, 16 July 2011

जानां.......




हाँ जानां
तू एक ख्वाब ही तो है
जो पैबस्त है
मेरे ख्यालों में
न जाने कबसे
..........

अगर हकीकत होता
तो कभी तो
मेरी बंदगी देख
साकार हुआ होता.......

गुंजन
१६/७/११

Thursday, 14 July 2011

तुम बिन ....... कृष्ण


द्वापर से लेकर आज तक
कितने युग बीते
पर तुमने मुझे
जाना ही नहीं
.............

कैसा लगता होगा
तुम्हें - मेरे बिन
इसकी कल्पना
कभी मेरे अधरों पर
तृप्त स्मित बन नहीं खेली

एक कच्चा-सा लाल धागा
तिर आता है मेरी आँखों की
कोरों पर....

अधूरी-सी सिसकी
गांठ बन उभर आती है
मेरे कंठ में....

यादों का स्पंदन
निह्श्वांस कर जाता है
मेरे जीवन को .......

क्यूंकि -
पूर्ण तो मैं भी नहीं हूँ
तुम बिन - मेरे कृष्ण

गुंजन
१४/७/११

Monday, 4 July 2011

आ जा .......



तू चाहे कहीं भी रहे
तेरा दर्द यहीं है
हसरत नहीं,
अरमान नहीं,
ख्वाइश भी नहीं है
प्यार और बस प्यार है
इसके सिवा कुछ भी नहीं है
आ जा
आ जा
कि अब तो बीत गयीं
कितनी सदियाँ
बोझिल आँखें भी
कब से सोयी नहीं हैं
तू आएगा, तू आएगा
मुझको न जाने क्यूँ यकीं है
जबकि जानती हूँ
कि तुझे मुझसे प्यार नहीं है.....

गुंजन
4/7/11
Monday

Friday, 1 July 2011

क़वायद......

न ख़ुशी ही हमें जीने देती है
न ग़म की क़िताब ही कभी पूरी होती है
कब मिलेगी निज़ात
इस मतलबी दुनिया से "गुन्जन"
आखिर क्यूँ ज़िन्दगी की क़वायद
कभी ख़त्म नहीं होती है........?

गुन्जन
1/7/11
Friday

Thursday, 30 June 2011

सावन.....


वो सावन के मौसम में गाना बजाना
मेहंदी से अपने हाथों को सजाना
वो झूले से महकती, अमुआ की डाली
कहाँ खो गयी वो अम्मा की गाली
कि जिससे सज़ा था बचपन हमारा
बड़ा ही प्यारा था, सफ़र वो सुहाना
न सखियाँ ही रही, अब वो पुरानी
प्यारा झुला भी बन गया
बीते बचपन की कहानी.........

गुंजन
29/6/11
Wednesday

Wednesday, 29 June 2011

मुद्दत.......



ये मुद्दत का
आसमान भी
कितना अंतहीन होता है
मैं जितनी मिटाती हूँ
लकीरें इसकी
वो उतना ही
विस्तृत होता जाता है......

गुंजन
29/6/11
Wednesday