Wednesday, 7 September 2011

मुझसे ही जन्मे हो तुम



क्या ईश्वर के सिवा
कहीं कुछ और नहीं
क्या मैं और तुम नहीं
नहीं हूँ मैं कोई आत्मा
न ही तुम कोई परम-आत्मा
मैं तो बस मैं हूँ
और तुम........
तुम तो कहीं हो ही नहीं
मुझसे ही जन्मे हो तुम
मुझ में ही समाये हो तुम
जो मैं हूँ तो तुम हो
जो मैं नहीं .......तो तुम भी नहीं
कहीं भी नहीं ........

गुंजन
५/९/११

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.
    आपका सरल अंदाज अच्छा लगता है.

    मेरे ब्लॉग की आप फालोअर बनी,इसके लिए आपका आभारी हूँ.
    अपने सुवचनों से टिपण्णी करके भी अनुग्रहित कीजियेगा मुझे.

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  2. दार्शनिकता से परिपूर्ण रचना !

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  3. बेहद गहरे अर्थों को समेटती खूबसूरत और संवेदनशील रचना. आभार.
    सादर

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  4. बहुत ही बेहतरीन रचना....

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  5. अर्थों को समेटती खूबसूरत रचना......

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  6. जो मैं हूँ तो तुम हो

    yahi sabse bada satya hai ..ji

    dhanywaad.

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  7. thanx for cmnt Gunjan....nahi to aapke blog se vanchit rah jati ...:)

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