Friday, 23 September 2011

आंसू



कल बड़ी देर तक
एक आंसू
मेरी आँख की कोर पर
अटका रहा
भरमाया सा
कई रोज़ बाद
तुझे देखा था
शायद इसलिए भी
पगला है .....
आज फिर
न जाने कितनी देर तलक
तेरी राह जोहता रहा

वाकई पागल है
तभी तो - आंसू है
बौराया सा .....

गुंजन
१६/९/११

9 comments:

  1. वाकई पागल है
    तभी तो - आंसू है
    बौराया सा .....

    बहुत ही बढ़िया।

    सादर
    ------------
    परिंदों का मन

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  2. वाकई पागल है
    तभी तो - आंसू है
    बौराया सा .....bhaavpurn abhivaykti...

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  3. waha bahut khub .....dil se likhi gayi lekhni...

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  4. सोचती हूँ तोड़ लूँ नाता इस कतरे से
    शायद तब मेरी सूखी आँखों में फिर दबदबाने के लिए तुम आ जाओ ....

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  5. वाकई पागल है
    तभी तो - आंसू है
    बहुत ही बढ़िया........

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  6. sundar...aansoo bhi pagle jinkii aankhon mein aate hain unhein bhii log emotional fool hi kahte hain...

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